संक्षिप्त विषय सूची :-

नोट : यहाँ पर प्रस्तुत आलेखों में स्वास्थ्य संबंधी जानकारी को संकलित करके पाठकों के समक्ष सरल भाषा में प्रस्तुत करने का छोटा सा प्रयास किया गया है। पाठकों से अनुरोध है कि इनमें बताई गयी दवाओं/तरीकों का प्रयोग करने से पूर्व किसी योग्य चिकत्सक से सलाह लेना उचित होगा।-डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'

--->--->श्रीमती जानकी पुरुषोत्तम मीणा जिनका 08 अप्रेल, 2012 को असमय निधन हो गया!

--->--->श्रीमती जानकी पुरुषोत्तम मीणा जिनका 08 अप्रेल, 2012 को असमय निधन हो गया!
सभी के स्वस्थ एवं सुदीर्घ जीवन की कामना के साथ-मेरे प्यारे और दुलारे तीन बच्चों की ममतामयी अद्वितीय माँ (मम्मी) जो दुखियों, जरूतमंदों और मूक जानवरों तक पर निश्छल प्यार लुटाने वाली एवं अति सामान्य जीवन जीने की आदी महिला थी! वह पाक कला में निपुण, उदार हृदया मितव्ययी गृहणी थी! मेरी ऐसी स्वर्गीय पत्नी "जानकी मीणा" की कभी न भुलाई जा सकने वाली असंख्य हृदयस्पर्शी यादों को चिरस्थायी बनाये रखते हुए इस ब्लॉग को आज दि. 08.08.12 को फिर से पाठकों के समक्ष समर्पित कर रहा हूँ!-डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'

शनिवार, दिसंबर 01, 2012

जायफल-Nutmeg

यह एक जायफल अनेक बीमारियों की दवा है-

जायफल के नाम : इसे भिन्न -भिन्न भाषाओं में भिन्न-भिन्न नामों से पुकारा जाता है.-बंगाली और गुजराती में जायफल, कन्नड़ और तेलगू में-जजिकाया, जादिफल, तमिल में-आदि परभम, कोसम, सालुगमे, सीलों में-सादिकई, कन्नर में जाजी, फारसी में-जोजबोय, अरबी में-जोजउल्तिब, जवावा, संस्कृत में-जातिफल, जातिशा, सगा, कोशा, मधुशोंदा, माल्तीफला, राज्बोग्या, शालुका और वैज्ञानिक भाषा में-Myristica fragrans.

जायफल के गुण : इसके पत्ते हरे -पीले रंग के अंडाकार और चिकने होते हैं। फूल सफ़ेद रंग के घंटियों के आकार के होते हैं। जायफल का पेड़ सुन्दर और विशाल होता है। जायफल का रासायनिक संग्थ्हन (संघठन) बहुत टिपिकल है-इसके फल में जिरानियाल, यूजीनोल, सैफ्रोल, आइसोयूजिनोल, फैटिक एसिड, लोरिक एसिड, आलिक एसिड, लिनोलिल एसिड, स्टीयारिक एसिड, मियारीस्टिक एसिड, मिरीस्टिक एसिड, पामिटिक एसिड, उड़नशील तेल, स्थिर तेल आदि तत्व पाए जाते हैं। इसी कारण जायफल का एक ग्राम चूर्ण बड़ी तेज काम करता है :-



जायफल के उपयोग :
  1. सर में बहुत तेज दर्द हो रहा हो तो बस जायफल को पानी में घिस कर लगाएं।
  2. सर्दी के मौसम के दुष्प्रभाव से बचने के लिए जायफल को थोड़ा सा खुरचिये, चुटकी भर कतरन हो जाए तो उसे मुंह में रखकर चूसते रहिये। यह काम आप पूरे जाड़े भर एक या दो दिन के अंतराल पर करते रहिये।
  3. आपको किन्हीं कारणों से भूख न लग रही हो तो चुटकी भर जायफल की कतरन चूसिये इससे पाचक रसों की वृद्धि होगी और भूख बढ़ेगी, भोजन भी अच्छे तरीके से पचेगा।
  4. दस्त आ रहे हों या पेट दर्द कर रहा हो तो जायफल को भून लीजिये और उसके चार हिस्से कर लीजिये एक हिस्सा मरीज को चूस कर खाने को कह दीजिये। सुबह शाम एक-एक हिस्सा खिलाएं।
  5. फालिज का प्रकोप जिन अंगों पर हो उन अंगों पर जायफल को पानी में घिसकर रोज लेप करना चाहिए, दो माह तक ऐसा करने से अंगों में जान आ जाने की 80%संभावना देखी गयी है।
  6. प्रसव के बाद अगर कमर दर्द नहीं ख़त्म हो रहा है तो जायफल पानी में घिसकर कमर पे सुबह शाम लगाएं, एक सप्ताह में ही दर्द गायब हो जाएगा।
  7. पैरों में जाड़े में बिवाई खूब फटती है, ऐसे समय ये जायफल बड़ा काम आता है, इसे महीन पीसकर बीवाइयों में भर दीजिये। 12-15 दिन में ही पैर भर जायेंगे।
  8. जायफल के चूर्ण को शहद के साथ खाने से ह्रदय मज़बूत होता है। पेट भी ठीक रहता है।
  9. अगर कान के पीछे कुछ ऎसी गांठ बन गयी हो जो छूने पर दर्द करती हो तो जायफल को पीस कर वहां लेप कीजिए जब तक गाठ ख़त्म न हो जाए, करते रहिये।
  10. अगर हैजे के रोगी को बार-बार प्यास लग रही है, तो जायफल को पानी में घिसकर उसे पिला दीजिये।
  11. जी मिचलाने की बीमारी भी जायफल को थोड़ा सा घिस कर पानी में मिला कर पीने से नष्ट हो जाती है।
  12. इसे थोडा सा घिसकर काजल की तरह आँख में लगाने से आँखों की ज्योति बढ़ जाती है और आँख की खुजली और धुंधलापन ख़त्म हो जाता है।
  13. यह शरीर की स्वाभाविक गरमी की रक्षा करता है, इसलिए ठंड के मौसम में इसे जरूर प्रयोग करना चाहिए।
  14. यह कामेन्द्रिय की शक्ति भी बढाता है।
  15. जायफल आवाज में सम्मोहन भी पैदा करता है।
  16. जायफल और काली मिर्च और लाल चन्दन को बराबर मात्रा में लेकर पीसकर चेहरे पर लगाने से चेहरे की चमक बढ़ती है, मुहांसे ख़त्म होते हैं।
  17. किसी को अगर बार-बार पेशाब जाना पड़ता है तो उसे जायफल और सफ़ेद मूसली 2-2 ग्राम की मात्र में मिलाकर पानी से निगलवा दीजिये, दिन में एक बार, खाली पेट, 10 दिन लगातार।
  18. बच्चों को सर्दी-जुकाम हो जाए तो जायफल का चूर्ण और सोंठ का चूर्ण बराबर मात्रा में लीजिये फिर 3 चुटकी इस मिश्रण को गाय के घी में मिलाकर बच्चे को कहता दीजिये। सुबह शाम चटायें।
स्त्रोत : मेरा समस्त,  TUESDAY 29 NOVEMBER 2011
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जायफल लाभकारी है त्वचा के लिए

जायफल को खाने के लिए प्रयोग किया जाता है। इससे ना सिर्फ खाने का स्वाद बढ़ाया जा सकता है, बल्कि कई छोटी-मोटी समस्याओं से भी निजात पाई जा सकती हैं। आयुर्वेद में जायफल का बहुत महत्व है। जायफल आपकी पेट संबंधी समस्याओं को दूर करता है। क्या आप जानते हैं, जायफल त्वचा के लिए भी बहुत महत्वपूर्ण है। त्वचा में निखार पाने के लिए जायफल का उपयोग किया जाता है। लेकिन सवाल ये उठता है कि जायफल से त्वचा पर निखार पाने के लिए क्या करें। जायफल का प्रयोग त्वचा के लिए कैसे करें? यह भी जानना जरूरी है कि क्या सचमुच जायफल लाभकारी है; त्वचा के लिए। आइए जानें जायफल त्वचा के लिए कितना किफायती है।

जायफल के त्वचा के लिए लाभ
  1. जायफल के इस्तेमाल से त्वचा पर पड़ने वाली झाईयों से आसानी से छुटकारा पाया जा सकता है।
  2. जायफल से ही त्वचा पर पड़ने वाले दाग-धब्बों से निजात पाई जा सकती है।
  3. यदि आप चाहते हैं कि आपकी आंखों के नीचे काले घेरे ना पड़े और आपकी आंखों की रोशनी भी तेज हो जाए तो आपको जायफल का इस्तेमाल करना चाहिए।
  4. धूप में या फिर उम्र के साथ चेहरे और शरीर के विभिन्न हिस्सों में झुर्रियां पड़ सकती हैं। यदि आप चाहते हैं कि झुर्रियां चेहरे और त्वचा पर ना पड़े तो आपको जायफल का इस्तेमाल करना चाहिए।
जायफल का इस्तेमाल
  1. चेहरे पर या फिर त्वचा पर पड़ी झाईयों को हटाने के लिए आपको जायफल को पानी के साथ पत्थर पर घिसना चाहिए। घिसने के बाद इसका लेप बना लें और इस लेप का झाईयों की जगह पर इस्तेमाल करें, इससे आपकी त्वचा में निखार भी आएगा और झाईयों से भी निजात मिलेगी।
  2. चेहरे की झुर्रियां मिटाने के लिए आप जायफल को पीस कर उसका लेप बनाकर झुर्रियों पर एक महीने तक लगाएंगे तो आपको जल्द ही झुर्रियों से निजात मिलेगी।
  3. आंखों के नीचे काले घेरे हटाने के लिए रात को सोते समय रोजाना जायफल का लेप लगाएं और सूखने पर इसे धो लें। कुछ समय बाद काले घेरे खुद-ब-खुद हट जाएंगे।
  4. अनिंद्रा का स्‍वास्‍थ्‍य पर बुरा असर पड़ता है और इसका त्वचा पर भी दुष्प्रभाव पड़ता है। त्वचा को तरोताजा रखने के लिए भी जायफल का इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके लिए आपको रोजाना जायफल का लेप अपनी त्वचा पर लगाना होगा। फिर आपकी अनिंद्रा की शिकायत भी दूर होगी और त्वचा भी तरोजाता रहेगी।
  5. कई बार त्वचा पर कुछ चोट के निशान रह जाते हैं तो कई बार त्वचा पर नील और इसी तरह के घाव पड़ जाते हैं। यदि आप इस तरह के घावों से निजात पाना चाहते हैं तो आपको चाहिए कि आप जायफल में सरसों का तेल मिलाकर मालिश करें। जहां भी आपकी त्वचा पर पुराने निशान हैं रोजाना मालिश से कुछ ही समय में वे हल्के होने लगेंगे। जायफल से मालिश से रक्त का संचार भी होगा और शरीर में चुस्ती-फुर्ती भी बनी रहेगी।
  6. आप चाहे तो जायफल के लेप के बजाय जायफल के तेल का भी इस्ते‍माल कर सकते हैं।
स्त्रोत : 24.02.12 By: अनुराधा गोयल, ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
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जायफल: स्वाद बढ़ाए, रोग भगाए

विभा मित्तल
जायफल बहुत ही थोड़ी मात्र में गरम मसाले के अन्दर प्रयोग किया जाने वाला एक मसाला है। यह बहुत ही गुणकारी होता है। इसके औषधीय गुण इसे और महत्वपूर्ण बना देते हैं। एक जायफल कई बीमारियों में काम आता है। बता रही हैं विभा मित्तल

भूख नहीं लगती हो तो चुटकी भर जायफल की कतरन चूसिए। इससे पाचक रसों की वृद्धि होगी, भूख बढ़ेगी और खाना भी ठीक से पचेगा।

जायफल के चूर्ण को शहद के साथ खाने से हृदय मजबूत होता है।

दांत में दर्द होने पर जायफल का तेल रुई पर लगाकर दर्द वाले दांत या दाढ़ पर रखें, दर्द तुरंत ठीक हो जाएगा। अगर दांत में कीड़े लगे हैं तो वे भी मर जाएंगे।

पेट में दर्द हो तो जायफल के तेल की 2-3 बूंदें एक बताशे में टपकाएं और खा लें। जल्द ही आराम आ जाएगा।

जायफल को पानी में पकाकर उस पानी से गरारे करें। मुंह के छाले ठीक होंगे, गले की सूजन भी जाती रहेगी।

जायफल को कच्चे दूध में घिसकर चेहरें पर सुबह और रात में लगाएं। मुंहासे ठीक हो जाएंगे और चेहरे निखारेगा।

एक चुटकी जायफल पाउडर दूध में मिला कर लेने से सर्दी का असर ठीक हो जाता है। इसे सर्दी में प्रयोग करने से सर्दी नहीं लगती।

कान के पीछे अगर सूजन हो या गांठ हो तो जायफल को पानी में घिसकर सूजन वाले स्थान पर लगाएं। सूजन ठीक हो जाएगी।

सरसों का तेल और जायफल का तेल 4:1 की मात्र में मिलाकर रख लें। इस तेल से दिन में 2-3 बार शरीर की मालिश करें। जोड़ों का दर्द, सूजन, मोच आदि में राहत मिलेगी।

फटी एड़ियों में जायफल को घिसकर बिवाइयों (दारों) में लगाएं, ठीक हो जाएंगी।

प्रसव के समय होने वाले दर्द से छुटकारा पाने के लिए जायफल को पानी में घिसकर, इसका लेप कमर पर करें, लाभ मिलेगा।

जायफल, सौंठ और जीरे को पीसकर चूर्ण बना लें। इस चूर्ण को भोजन करने से पहले पानी के साथ लें। गैस और अफारा की परेशानी नहीं होगी।

दस जायफल लेकर देशी घी में अच्छी तरह सेंक लें। उसे पीसकर छान लें। अब इसमें दो कप गेहूं का आटा मिलाकर घी में फिर सेकें। इसमें शक्कर मिलाकर रख लें। रोजाना सुबह खाली पेट इस मिश्रण को एक चम्मच खाएं, बवासीर से छुटकारा मिल जाएगा।

नीबू के रस में जायफल घिसकर सुबह-शाम भोजन के बाद सेवन करने से गैस और कब्ज की तकलीफ दूर होती है।
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त्वचा के लिए लाभकारी जायफल

जायफल के गुणकारी उपयोग
उपयोग : शोथ हर, वेदना नाशक, वातशामक और कृमिनाशक होने से स्नायविक संस्थान के लिए उपयोगी होता है तथा रोचक, दीपक, पाचक, यकृत को सक्रिय करने वाला और ग्राही होने से पाचन संस्थान के लिए उपयोगी होता है। अनिद्रा, शूल, अग्निमांद्य, कास (खाँसी), श्वास, हिचकी, शीघ्रपतन और नपुंसकता आदि व्याधियाँ दूर करने में उपयोगी होता है। इसके चूर्ण और तेल को उपयोग में लिया जाता है।

त्वचा की झाइयाँ : पत्थर पर पानी के साथ जायफल को घिसें और लेप तैयार कर लें। इस लेप को नेत्रों की पलकों पर और नेत्रों के चारों तरफ लगाने से नेत्र ज्योति बढ़ती है, चेहरे की त्वचा की झाइयाँ और धब्बे आदि दूर होते हैं। लगातार कुछ दिनों तक लेप लगाना चाहिए।

दूध पाचन : शिशु का दूध छुड़ाकर ऊपर का दूध पिलाने पर यदि दूध पचता न हो तो दूध में आधा पानी मिलाकर, इसमें एक जायफल डालकर उबालें। इस दूध को थोडा ठण्डा करके कुनकुना गर्म, चम्मच कटोरी से शिशु को पिलाएँ, यह दूध शिशु को हजम हो जाएगा। 

जोड़ों का दर्द : शरीर के जोड़ों में दर्द होना गठिया यानी सन्धिवात रोग का लक्षण होता है। गठिया के अलावा चोट, मोच और पुरानी सूजन के लिए जायफल और सरसों के तेल के मिलाकर मालिश करने से आराम होता है। इसकी मालिश से शरीर में गर्मी आती है, चुस्ती फुर्ती आती है और पसीने के रूप में विकार निकल जाता है।

उदर शूल : पेट में दर्द हो, आद्यमान हो तो जायफल के तेल की 2-3 बूँद शकर में या बताशे में टपकाकर खाने से फौरन आराम होता है। इसी तरह दाँत में दर्द होने पर जायफल के तेल में रूई का फाहा डुबोकर इसे दाँत-दाढ़ के कोचर में रखने से कीड़े मर जाते हैं और दर्द दूर हो जाता है। इस तेल में वेदना स्थापना करने का गुण होता है, इसलिए यह तेल उस अंग को थोड़े समय के लिए संज्ञाशून्य कर देता है और दर्द का अनुभव होना बन्द हो जाता है।

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कई तरह के दर्द का एक हल है जायफल

खाने का स्वाद बढ़ाने के लिए या किसी भी डिश को विशेष स्वाद देने के लिए उसमें जायफल का उपयोग किया जाता है। लेकिन जायफल न सिर्फ खाने का जायका बढ़ाता है बल्कि इससे कई तरह के रोगों के उपचार भी संभव है। जायफल अमाशय के लिए विशेष रूप से फायंदेमंद है।

आमाशय के लिए उत्तेजक होने से आमाशय में पाचक रस बढ़ता है, जिससे भूख लगती है। आंतों में पहुंचकर वहां से गैस हटाता है। ज्यादा मात्रा में यह मादक प्रभाव करता है। इसका प्रभाव मस्तिष्क पर कपूर के समान होता है, जिससे चक्कर आना, प्रलाप आदि लक्षण प्रकट होते हैं। इससे कई बीमारियों में लाभ मिलता है तथा सौन्दर्य सम्बन्धी कई समस्याओं से भी निजात मिलती है।

आयुर्वेद में जायफल को वात एवं कफ नाशक बताया गया है। सुबह-सुबह खाली पेट आधा चम्मच जायफल चाटने से गैस्ट्रिक, सर्दी-खांसी की समस्या नहीं सताती है। पेट में दर्द होने पर चार से पांच बूंद जायफल का तेल चीनी के साथ लेने से आराम मिलता है। छोटे बच्चों को सरसों के तेल में जायफल मिलाकर चटाने से उल्टी नहीं होती है और उनका हाजमा ठीक रहता है। सरसों तेल में जायफल के तेल की कुछ बूंदें मिलकार मालिश करने से चोट एवं मोच में आराम मिलता है। चेहरे पर मुंहासे अधिक हो रहे हैं तो जायफल का लेप चेहरे पर लगाएं। इससे मुंहासे सूख जाएंगे। झाईयों में भी मुंहासों का लेप गुणकारी होता है। इससे रंगत भी निखरती है।

शिशु का दूध छुड़ाकर ऊपर का दूध पिलाने पर यदि दूध पचता न हो तो दूध में आधा पानी मिलाकर, इसमें एक जायफल डालकर उबालें। इस दूध को थोडा ठण्डा करके कुनकुना गर्म, चम्मच कटोरी से शिशु को पिलाएँ, यह दूध शिशु को हजम हो जाएगा।शरीर के जोड़ों में दर्द होना गठिया यानी सन्धिवात रोग का लक्षण होता है। गठिया के अलावा चोट, मोच और पुरानी सूजन के लिए जायफल और सरसों के तेल के मिलाकर मालिश करने से आराम होता है। इसकी मालिश से शरीर में गर्मी आती है, चुस्ती फुर्ती आती है और पसीने के रूप में विकार निकल जाता है।

पेट में दर्द हो जायफल के तेल की 2-3 बूंद शकर में या बताशे में टपकाकर खाने से फौरन आराम होता है। इसी तरह दांत में दर्द होने पर जायफल के तेल में रूई डुबोकर इसे दांत-दाढ़ के कोचर में रखने से कीड़े मर जाते हैं और दर्द दूर हो जाता है। इसके तेल में दर्द को रोकने का गुण होता है। इसलिए दर्द का अनुभव होना बन्द हो जाता है। 
स्त्रोत : धर्मडेस्क. उज्जैन | Oct 12, 2011, 
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